Missing report of Goal”

बहुत ही चमकीली और सुन्दर आखोँ वाला बिलकुल काले-काले बालों वाला ऐसा होगा? वो आप लोगों ने कहीं देखा होतो कृपया करके जरूर बताने की तकलीफ उठायें वो बहुत ही जरूरी हैं मेरे जीने के लिये ,उसके बीना मेरी नींद ,चेन सब गायब हैं।पता नहीं कब घर से नीकला था। अभी कहा है कुछ भी पता नहीं है, अरे कुछ बता के भी तो नही गया देखो एसे बीना बताये कोइ कई जाता हैं।भला ? पीछले पन्द्रह दिनों से लापता हैं।। मै पन्द्रह दिनों से लगातार परेशान हूँ FRI र्दज कराने का सोच तो कब से रही थी पर समाज ,लोग रिसतेदार सब कया सोचेंगे बातें बनायेंगे ,अरे मेने तो ये भी सोच लिया था कि कई सामाजिक बहिष्कार नहीं करदे सोचो कीतनी घटीया बात हैं लोग थुकेगे मुझ पर अगर उनको पता चल गया की भयी इनका कोई Goal ही नहीं है। और थे वो भी छोड़ के भाग लिए कोइ बुध्दिजीवि मील गया तो और बेडा. गर्ग हैं। वो अलग ज्ञान बाटेंगे, अरे भई हर इंसान का जीवन मे कुछ Goal होना चाहिए।। ये बहुत जरूरी हैं। ये अगर नहीं हो तो इनसान जीवन मे कुछ भी हासिल नहीं कर सकता ,पता नही इतनी सारी सलाह की शाखाएं आपके सीर पर लटकने लग जायेगी , की अछा खासा फुटबॉल का खीलाडी. गोल का Goal ” भुल जाये। ठीक हैं। जीवन मे होना चाहिये पर जबरदस्ती तो नहीं हैं कुछ बीना Goal” के भी अछा खासा गोल ” कर लेते हैं। इस जीवन रुपी फुटबॉल मे?????

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बारिश”

पतों पर ठहरी,कभी फिसलती हुई बूदें। बङी सुहानी सी हैं।। इस खुसनुमा मोसम मे, दिल मे ठहरी कोई कहानी सी हैं।। शीशे के बाहर के तुफान से, …. … भीतर के तुफान की कुछ रवानी सी हैं।। बुदोँ की रून -झुन के साथ, धडृकनो की धुन कुछ जानी पहचानी सी हैं।। बारिश के साथ गुम हो जाना, अपनी आदत पुरानी सी हैं।। एक लम्हे मे कई लम्हात जी लेना, मोसम की महरबानी सी हैं।। धरती पर बिखरती शबनम से कई खवाहिशे नीराली सी हैं।। सर्द हवाओ की दसतक ,पृकृति को लेने अपनी पनाहों मे, बारिश की लडिय़ां गीरने वाली सी है।।।।।। बारिश……… मे गुम हो जाना आदत अपनी पुरानी सी हैं।।

“beat of ढिठ! “

आज मैं जो बात शेयर करनेवाली हू। वो एक बहुत ही सामान्य बात है। जो हम सब रोजाना महसूस करते होंगे पर उसपर अमल तब तक नहीं करते जब तक उस गलत आदत से हद से बड.कर कोई नुकसान नहीं हो जाता। जैसे कि आज कल मेरे साथ हो रहा हैं। रोज रात अलार्म लगता हैं पांच बजे का, ओर बेचारा बजता भी पांच बजे ही है, पर मेरे आलस की वो आज तक नहीं बजा पाया। बजता है अलार्म ओर मैरा हाथ नींद मे कब उसका गला दबा देता है पता ही नहीं चलता। हर रोज गला दबवाकर बेचारा वो भी थक गया होगा। वो भी अब चेन की नींद सोना चाहता होगा कयोंकि मे उसका गला लगातार छः दीनो से दबा रही हू पर आज वो मुझे मजा चखाने के मुड मे था, सायद आज सुबह जगना जरूरी था कहीँ काम से जाना था मुझ, और आज मोका था मुझ जैसे” ढीठ को बीट” मीलने का। वो बजा नही और मे उठी नही तो दोस्तों मे घर पर बेठकर ये ब्लॉग लीख रही हू की हर काम और समय कि अपना एक अलग महत्व हैं। तो ढिठ ना बने नही तो बीट कभी भी मिल सकती हैं।। ये बात अकेले मैरी नहीं है, ओर ना ही एक सुबह उठने के विषय मे है, ये बात रोजमर्रा के जीवन मे होने वाली कई बातों से सबध रखती हैं। जो हम आलस के चलते ढीठ बने रहते जब तक की कहीं से तगड़ी वाली बीट ना मीले।।।

बस यूँ ही ।

  1. बस यूँ ही आज लिखने को हाथ चल पड़ा, बस यूं ही आज बकवास करने को मन कर गया, सोचा तो नहीं था की फिर से ये मन करेगा कभी ,पर आज आखिर कर गया कयोंकि ये भी आज पूरी तरह से भर गया। कहने को तो है बहुत कुछ पर क्या करें ये भी बीचारा डर गया।वेसे तो मन के पास दिमाग होता तो नही हैं, फीर भी वो अपना जुगाड़ कर गया। ओर फीर से इस नालायक का कुछ भी नहीं लिखने का मन कर गया।

“Arrange engagement”

Engagement  मतलब सगाई आजकल वेसे भी कौन बोलता है।” सगाई” किसी english मिडियम पढ़े बचे को तो पूछ लो पता ही नही ये होती क्या है ” सगाई” ये हुयी नही की आजकल फोन पर बाते भी सुरु हो जाती है। न जाने क्या बाते करते है। इतनी लम्बी  -लम्बी!! कैसे हो आप ?और “आई लव यू” तो जैसे राम नाम की माला हो गयी है। जो दिन मे जितनी बार फेरो कम है। बाबू ,बाबी ,जानू, सोना, का तो पूछो ही मत घंटो लम्बी चलती  है। प्यार भरी मीठी मीठी बाते पढ़ाई लिखाई नोकरी चाकरी सब  तेल लेने चले जाते है।सालभर तक तो बस वो ही राजकूमार दीखते है। और खुद राजकुमारी जी!! पर धीरे – धीरे जब  प्यार तकरार मे बदलने लगता है । तब दोनों ही  एक दूसरे से कन्नी काटने लग जाते है। समझ नई आता कौन  गलत है ,कौन सही है।कभी कोई फैमिली मेम्बर  उबलती मे ghee दाल देता है तो क़भी घी की जरूरत ही नही पड़ती।अरे ये तो मै  बताना   भूल ही गयी पहले तो  attraction ही था अब तो प्यार भी हो गया है।वो भी गहरा वाला। तो अब इन लड़ाई झगड़ो का क्या करे फिर भी कोई न कोई बात पे ठन ही जाती है क्योकि इतने दिन तो नया -नया  इश्क था अब इश्क की गाड़ी “”आशा”” पे जो आ टिकी है मेरा मतलब् है। अब प्यार मे acspactations भी तो होती है।एक दूसरे की केयरिंग की  gifts की,तो अब aftrall enggegment जो की है। भई आप भावी पति जो बनने वाले हो अब होते है।झगडे सुरु और दोनों करते है। एक दूसरे को इग्नोर करना सुरु; अब करे क्या रिश्ता तोड़ नही सकते क्यों की बात प्यार ,और परिवार ,  दोनों की है।   ये होती है।arrange engagement.. जिसको  arrange करते-करते इंसान खुद  unarranged  हो जाता है। 

thinking about writing “

Aftr yesterday’s post, I am still thinking that in today’s world I  should write in English because now days this is the trend,I don’t know why everyone wants to be perfect in English speaking ,writing because no one wants to be insulted in modern era!!they wants to be follow.I also want to be write in English in a perfect manner… Because if I will write in English people consider me the genius , smart ,forward etc.my point is that if I don’t write in English even I want to accept manny persons are not able to express properly… So what u thin…about writing.. Are they exist  or nt… I am not against the English language even I love  It. but we should respect and give importance to our native language.